क्या है मेरी पहचान ? ह र सुबह की तरह ही आज की सुबह की शुरुआत हुई। किसी को स्कूल जाने की जल्दी थी! तो किसी को ऑफिस जाने की जल्दी थी! और मुझे उन लोगों को वक्त पर भेजने की जल्दी थी। मैंने अपने पति को नाश्ता दिया और उनसे कहा "क्या आप मुझे मेरी माँ के घर छोड़ दोंगे?" उन्होंने कहा "ठीक है! तुम्हें छोड़ दूंगा लेकिन जल्दी करो मुझे देर हो रही है।" "मैं तैयार ही हूँ !" इतना कहकर मैं कमरे में गई और सूटकेस लेकर आ गई। उन्होंने जैसे ही मेरा सूटकेस देखा उसने कहा "कितने दिन के लिए जा रही हो? मुझे लगा कि तुम केवल आज के दिन के लिए ही जा रही हो!" "कुछ दिन वहां रखूंगी लेकिन जल्दी आ जाऊंगी।" मैंने कहा "लेकिन बच्चों का स्कूल?" उसने कहा "उनकी कुछ दिनों के की छुट्टी है। आप फिक्र ना करें उनकी पढ़ाई का कोई नुकसान नहीं होगा।" इतना कहकर मैं उनकी तरफ देखने लगी "अरे! नहीं तुम जाओ मेरा कहने का वह मतलब नहीं था ठीक है चलो मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।" इतना कहकर उन्होंने अपना नाश्ता किया और मुझे मेरी माँ के घर तक छोड़ दिया और वह ऑफिस क...
बस स्टॉप वाला मेरा मासूम प्यार... 2 मई शाम 5:00 बजे का समय धूप अब दोपहर के मुकाबले कम थी लेकिन गरम हवा ने मेरी जान ले रखी थी और उसी के साथ ऑफिस के हजारों कॉल्स। एक कॉल खत्म करी तो दूसरा कॉल आना शुरू। फोन की रिंग से में इरिटेट हो गई। उस कॉल को डिस्कनेक्ट करके मैंने अपना फोन जैसे तैसे अपने टोट बेग में रखा और और रोड क्रॉस कर के बस स्टॉप पर जाने लगी। बस का समय 5:15 का था। ऑफिस से निकलते और रोड क्रॉस करते-करते मुझे 5:15 पहले ही हो गए थे। मेरी नजर कभी अपने हाथ में पहनी घड़ी की तरफ जाती तो कभी मेरे सामने से गुजरती गाड़ियों की तरफ। रोड क्रॉस करके जैसे ही मैं बस स्टॉप पर पहुंची तो मुझे पता चला कि बस 10 मिनट देर से आएगी। जीसे सुनकर मुझे एक तरफ राहत हुई कि 'मैं लेट नहीं हुई।" लेकिन दूसरी तरफ मुझे मौसम का हाल देखकर खुद पर तरस आया कि अब मुझे 10 मिनट और यहां खड़ा होना होगा। मैं बस का इंतजार करते बार-बार मेरी नजर अपनी घड़ी पर पड़ती और मैं बस को कोसने लगती की आज ही इसे देर से आना था। मेरी बस लेट होने के कारण दूसरी बस का शेड्यूल करीब आ गया और उस बस के लोग भी अब आकर बस स्टॉप पर वेट करने लगे...