बस स्टॉप वाला मेरा मासूम प्यार... 2 मई शाम 5:00 बजे का समय धूप अब दोपहर के मुकाबले कम थी लेकिन गरम हवा ने मेरी जान ले रखी थी और उसी के साथ ऑफिस के हजारों कॉल्स। एक कॉल खत्म करी तो दूसरा कॉल आना शुरू। फोन की रिंग से में इरिटेट हो गई। उस कॉल को डिस्कनेक्ट करके मैंने अपना फोन जैसे तैसे अपने टोट बेग में रखा और और रोड क्रॉस कर के बस स्टॉप पर जाने लगी। बस का समय 5:15 का था। ऑफिस से निकलते और रोड क्रॉस करते-करते मुझे 5:15 पहले ही हो गए थे। मेरी नजर कभी अपने हाथ में पहनी घड़ी की तरफ जाती तो कभी मेरे सामने से गुजरती गाड़ियों की तरफ। रोड क्रॉस करके जैसे ही मैं बस स्टॉप पर पहुंची तो मुझे पता चला कि बस 10 मिनट देर से आएगी। जीसे सुनकर मुझे एक तरफ राहत हुई कि 'मैं लेट नहीं हुई।" लेकिन दूसरी तरफ मुझे मौसम का हाल देखकर खुद पर तरस आया कि अब मुझे 10 मिनट और यहां खड़ा होना होगा। मैं बस का इंतजार करते बार-बार मेरी नजर अपनी घड़ी पर पड़ती और मैं बस को कोसने लगती की आज ही इसे देर से आना था। मेरी बस लेट होने के कारण दूसरी बस का शेड्यूल करीब आ गया और उस बस के लोग भी अब आकर बस स्टॉप पर वेट करने लगे...