ऑन द एज ऑफ पैराडाइज
On The Edge Of Paradise
मेरा नाम आर्यन आप्ते है। उम्र 25 साल,कद 6 फीट, रंग गोरा, पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर। माता-पिता और एक छोटी बहन के साथ रहता हूँ। पिता सरकारी अधिकारी है, माता प्राइवेट स्कूल की अध्यापक है। लड़की पढ़ी-लिखी और रीति-रिवाजों को मानने वाली होनी चाहिए जो परिवार को साथ लेकर चल सके......
मैंने गुस्से में माँ से कहा 'बस इतना सही है या और कुछ भी लिखना है!' माँ ने हंसकर कहा 'नहीं! ठीक है आगे का में लिख दूंगी।'
मेरे घरवाले जब से मेरी नौकरी लगी है तब से शादी के लिए मेरे पीछे पड़े हैं,लेकिन मुझे अभी शादी नहीं करनी है मुझे अभी अच्छे से सेटल होना है और खुद के और अपने परिवार के लिए बहुत सारी चीजें करनी है लेकिन मेरे सपनों को कोई समझे तो?
माँ ने संदेह भरी निगाहों से मेरी तरफ देखा और कहने लगी 'शादी की बात आते से ही तेरा मुंह क्यों बन जाता है?' मैंने तुरंत कहां 'ये हर वीकेंड लोगों के घर जाकर समोसे खाना मुझे अच्छा नहीं लगता।' माँ मेरी बात सुनकर जोर से हंस पड़ी और कहा 'तो समोसे बनाने को मना कर देती हूं? वाइट सॉस पास्ता...' मैंने उनकी बात बीच में काट कर कहा 'क्या यार माँ हद करते हो चलो मैं जा रहा हूँ मुझे पहले ही ऑफिस के लिए लेट हो रहा है।' इतना कहकर मैं जल्दबाजी में अपने जूते पहने लगा। 'अरे! बेटा टिफिन तो लेते जा..' पीछे से माँ ने आवाज लगाई 'मैं ऑफिस में कुछ खा लूंगा पहले ही मैं बहुत लेट हो गया हूँ।' इतना कहकर मैं घर से निकल गया ऑफिस के लिए।
मेरा ऑफिस ज्यादा दूर नहीं था। 30 मिनट लगते हैं मेरे घर से,लेकिन बारिश के मौसम है तो थोड़ा धीरे बाइक चलाता हूं। इस वजह से मुझे 10 मिनट ज्यादा लगते है। हमेशा की तरह मैं फिर 5 मिनट लेट। बॉस ने मुझे घूर कर आज फिर से कहां '5 मिनट पहले आया करो।' मैंने भी सर हिला कर 'हाँ...हाँ...' कह दिया।
फिर मैं जाकर अपने केबिन में बैठ गया। मैं काम करने से पहले कभी अपना फोन या सोशल साइट चेक नहीं करता हूं क्योंकि मैं इससे डिस्ट्रेक्ट हो जाता हूं। 30 मिनट हुए थे मुझे कोडिंग करतें इतने में मेरे फोन पर दो नोटिफिकेशन आए। मैंने तुरंत चेक करा मैंने देखा कि पहला नोटिफिकेशन बैंक की तरफ से आया था और दूसरा फेसबुक पर मुझे किसी "चांदनी भाती" ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। मैं तुरंत उस पेज पर गया उसमें उसकी कुछ ज्यादा डिटेल्स नहीं थी प्रोफाइल पिक्चर पर केवल एक लड़की की आंखें दिख रही थी। उन आंखों को काजल से सजाया गया था उसमें कोई बनावटी मेकअप नहीं था। वह इतनी चमकीली थी कि किसकी को भी मदहोश कर सकती हैं। मैं 2 मिनट के लिए उन आंखों को देखकर अपनी अलग ही दुनिया में खो गया मैं कल्पना करने लगा उसका पूरा चेहरा मेरी जिज्ञासा उसके पूरे चेहरे को देखने की होने लगी लेकिन उसकी मासूम सी आंखें जैसे मेरे दिल में बस गई हो। इससे पहले मैंने कभी किसी लड़की को इस तरह से नहीं देखा मतलब किसी की आंखों को लेकिन इन आंखों में कुछ नया था। मैंने तुरंत उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया और उसे मैसेज किया 'हाय!' उसका कोई रिस्पांस नहीं आया। मैं 10 मिनट तक वेट करके फिर अपना काम करने लगा। पूरा दिन गुजर गया मेरे घर जाने का वक्त हो गया। मैं अपना सामान समेट कर अपनी बाइक की तरफ जाने लगा मैंने अपना फोन निकाल कर एक बार फिर चेक किया। ना जाने मैंने कितनी बार अपना फोन चेक किया होगा उसके मैसेज के इंतजार में लेकिन अब भी मुझे उसके मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं मिला। ऐसे करके चार-पांच दिन बीत गए लेकिन मुझे उस मैसेज का कोई रिस्पांस नहीं मिला। मैं बस चैट बॉक्स खोल कर देखता मायूस हो जाता। फिर मैंने सोचा कि शायद कोई फेक अकाउंट होगा खुद को दिलासा देकर मैंने जाने दिया लेकिन मेरे दिल और दिमाग में वह दो आँखें जैसे बस गई थी। शायद उन आंखों से मुझे पहली नजर का प्यार हो गया था।
एक शाम में यूं ही ऑफिस से घर आने के लिए अपनी बाइक स्टार्ट कर रहा था तभी मेरे फोन में एक नोटिफिकेशन आता है। मैंने तुरंत अपना फोन चेक किया तो मैंने देखा फेसबुक पर चांदनी ने मुझे मैसेज भेजा था
'हाय! कैसे हो?'
मैंने अपनी बाइक साइड में रखी और तुरंत रिप्लाई किया 'मैं ठीक हूं। तुम कैसी हो?'
उसका रिप्लाई आता है 'मैं भी ठीक हूं।'
मुझे समझ नहीं आ रहा था अब उसे क्या कहूँ लेकिन मुझे उससे बातें करने का मन कर रहा था। फिर उसका ही मैसेज आया 'आप कहां से हो?'
मैंने तुरंत रिप्लाई किया 'पुणे तुम कहां से हो?'
उसने कहा 'झाडो'
यह नाम सुनकर मैं 2 मिनट चुप रहा क्योंकि आज से पहले मैंने यह नाम कभी नहीं सुना था फिर मैंने उससे कहा 'वैसे यह है कहां?'
उसने कहा 'यह उदयपुर में है।'
तो मैंने उससे कहा 'तो क्या तुम राजस्थानी हो?'
उसने कहा 'हाँ और आप?'
मैंने उससे कहा 'मैं महाराष्ट्रीयन हूँ।'
उसने कहा 'अच्छा।'
अब इसके आगे क्या कहूं कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैंने सीधे ही उसे कह दिया 'तुम्हारी आंखें बहुत सुंदर है।' उसका रिप्लाई आया 'क्या मतलब!'
मैंने उससे कहा 'अरे! जो तुमने प्रोफाइल पिक लगाई है ना वह आंखे बहुत सुंदर है। क्या वह तुम्हारी है?'
उसका 10 मिनट तक कोई रिप्लाई नहीं आता है मैं डर गया कि कहीं उसे बुरा तो नहीं लगा। लेकिन 10 मिनट बाद उसने रिप्लाई किया 'क्या है मेरी आंखें में एसा?'
मैंने उससे कहा 'बहुत खूबसूरत है।'
इसका रिप्लाई आता है 'हर कोई देखकर यही कहता है।'
मैं जिज्ञासा के साथ उससे पूछने लगा 'हर कोई मतलब क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?'
रिप्लाई आता है 'हर कोई मतलब सभी जो भी मेरी आंखों को देखते हैं।'
'अच्छा क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है।' बेशर्मी से मैंने फिर पूछ लिया। लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
'नहीं मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। वैसे क्या मैं आपको जानती हूं आप मुझसे इस तरह से कोई पर्सनल सवाल कैसे कर सकते हैं।' थोड़ी देर बाद उसका रिप्लाई आया। मैने घबराकर उसको रिप्लाई किया 'एम सॉरी अगर मैंने कुछ गलत कह दिया हो तो।'
यह सारी बातें करते-करते लगभग 2 घंटे से मैं ऑफिस के नीचे ही खड़ा था। तभी मुझे माँ का फोन आता है और वह घबराते हुए कहती है 'बेटा अभी तक घर नहीं आया तू कहां फंसा है?' मैं उन्हे कहता हूं 'माँ मैं आ रहा हूं रास्ते में ही हूं।'
चांदनी को मैसेज किया के 'मैं तुमसे थोड़ी देर बाद बात करता हूं।' उसका कोई रिप्लाई नहीं आया। मैसेज करने के बाद मैं घर के लिए निकल गया। ऑफिस से घर तक के पूरे रास्ते में मैं सिर्फ हम दोनों के बीच जो भी बातें हुई उसके बारे में सोचता रहा और उससे आगे क्या पूछूं क्या कहूं यही सोचते रहा। मैं घर आकर फ्रेश हुआ। उसके बाद मैंने डिनर किया। फिर अपने कमरे की खिड़की पर खड़े होकर बारिश देखने लगा आज भी उसी तरह से बारिश हो रही थी जैसे हर रोज होती है लेकिन फिर भी आज की बारिश में मुझे कुछ अनोखा सा महसूस हो रहा था। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरे चारों तरफ खुशियां ही खुशियां है मुझे ना किसी चीज की चिंता सता रही थी ना ऑफिस का काम ना घर वालों की शादी करने वाली बात...कुछ नहीं... मैं सिर्फ बारिश देख रहा था और मेरे आंखों के सामने बार-बार वह दो आंखें आ रही थी।
कुछ दिन एसे ही बित गए।
एक रात लगभग 10:15 बज चुके थे मैंने अपना फोन हाथ में लिया और उसे "गुड नाइट" का मैसेज लिखकर भेज दिया। कुछ पल भी नहीं बीते होंगे और उसका रिप्लाई आता है 'गुड नाइट' मैंने हिम्मत करके उसको फिर से मैसेज किया 'क्या तुम अभी भी जाग रही हो?'
उसने मुझसे कहा 'हाँ तो!'
बात को थोड़ा मोड़ते हुए मैंने कहा 'वैसे कहां से हो तुम?'
उसने कहा ' उदयपुर में एक गाँव है झाडो वहां से। अरे! बताया तो था तुम्हे.. वैसे तुम भी तो जाग रहे हो?'
मैंने उससे कहा 'हाँ मैं जाग रहा हूं। मुझे लगा शायद जो लोग गाँव में रहते हैं वह जल्दी सो जाते हैं।'
उसका रिप्लाई आता है 'अपनी सोच को जरा विराम दीजिए बहुत ज्यादा ही सोचते हो....'
मैंने उससे कहा 'तुम्हारी आंखें बहुत खूबसूरत है।'
उसने रिप्लाई किया ' तुम मुझे इमप्रेस करने के लिए कुछ नया ट्राई करो।'
यह बात पढ़ कर मुझे बहुत जोर से हंसी आई मैंने भी हिम्मत करके कह दिया 'शायद मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।'
उसने कहा ' 10 मिनट किसी से बात करने से कोई किसी से प्यार कर सकता है।'
मैंने उससे कहा 'हाँ! क्यों नहीं..'
उसका रिप्लाई आता है 'जरा मुझे समझाना कैसे?'
'देखो चांदनी जब तुमने मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी ना तब मैंने तुमसे ना कोई बात की थी ना मैंने तुम्हारा पूरा चेहरा देखा है ना मैं तुम्हारे घरवालों को जानता हूं! मैं तुम्हारे बारे में कुछ भी नहीं जानता। लेकिन तुम्हारी इन दो आँखों ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना दिया तुमसे प्यार करने के लिए मजबूर कर दिया।'
रिप्लाई आता है 'यह कोई फेक आईडी तो नहीं है?'
मैंने उससे कहा 'पहले तो तुम्हारा फ्रेंड रिक्वेस्ट आया था?'
'हाँ ठीक है मैं कल बात करती हूं तुमसे।' इतना कहकर उसने मुझे और मैसेज नहीं किया।
6 महीने से हमारी नॉर्मल बातचीत हो रही थी। हम दोनों एक दूसरे को जानने और समझने लगे थे। शायद हम प्यार करने लगे थे।
एक रात अचानक उसने मुझे मैसेज किया कि 'मेरी शादी होने वाली है।'
'कैसे! किसके! किसे साथ।' मैंने तुरंत उसे रिप्लाई किया।
लेकिन उसका बस एक ही मैसेज आता है 'ठीक है तुम इतना ही प्यार करते हो तो एक काम करो कल मेरे गांव आ जाओ।'
"कल!" मैं थोड़ी देर के लिए उलझन में पड़ गया कि मैं उसके गाँव केसे जाऊंगा? ना मुझे वहां के बारे मैं कुछ पता है ना मैं कभी वहां गया हूं यहां तक कि मैं तो कभी उदयपुर भी नहीं गया हूं लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत करके उसे "हाँ" कह दिया।
उसने मुझे रिप्लाई किया 'ठीक है कल मिलते हैं।'
मैंने उससे कहा 'अगर मैं तुमसे मिलने आया तो क्या तुम मुझसे शादी कर लोगी।'
उसने रिप्लाई किया 'हाँ कर लूंगा! तुम आओ तो सही।'
मैंने उससे कहा 'ठीक है फिर।'बस इतना कह कर मैंने अपना फोन रख दिया।
मैंने अपना लैपटॉप निकला और जल्दी से सर्च करने लगा के उसके गाँव कैसे पहुंचा जा सकता है। मैने पता किया के उसके लिए पहले मुझे उदयपुर जाना होगा फिर वहां से मैं उसके गाँव जा पाऊंगा। मैंने तुरंत पुणे से उदयपुर की फ्लाइट बुक करी। मुझे रात के 3:00 बजे की फ्लाइट मिलीं जो दिल्ली होल्ड करके उदयपुर पहुंचेगी। 5 घंटे का सफर था मैंने तुरंत अपनी टिकट बुक कर ली उस वक्त रात के करीब 11:30 बज रहे थे। मैं माँ और पापा के कमरे के बाहर जाकर थोड़ी देर शांत खड़ा रहा और सोचने लगा "मैं क्या कहूंगा" फिर हिम्मत करके डोर नोक करने लगा। कुछ मिनट बाद माँ अपनी आंखें मसलते हुए दरवाजा खोलती है दरवाजे के बाहर मुझे देखकर हैरानी से कहती है आर्यन क्या हुआ! कुछ हुआ है क्या?'
मैं थोड़ा सहम कर कहने लगा 'मेरी आज रात.. मेरी आज रात फ्लाइट है रात के 3:00 बजे की' जल्दी से मैंने कहा 'मैं उदयपुर जा रहा हूं ऑफिस के काम के लिए परसों तक घर आ जाऊंगा।' इतना कहकर मैंने जोर से सांस लीया।
फिर माँ कहती है 'ऐसा कौन सा काम है? जो इस वक्त तुझे जाना पडेगा। सच बता तू भूल गया था ना मुझे पहले बताना।'
मैंने अपनी आंखें बड़ी कर ली कि मुझे तो कोई बहाना ही नहीं बनाना पड़ेगा अब मैंने तुरंत कह दिया 'हाँ माँ मैं भूल गया था आपको बताना।' माँ गुस्से से मुझसे कहने लगी 'तू हर बार एसा करता है अब इतनी जल्दी तेरी पैकिंग कैसे होगी।'
'माँ! मैं सिर्फ 1 दिन के लिए जा रहा हूं मुझे ज्यादा कपड़ों की जरूरत नहीं है केवल 1 जोड़ी कपड़ा मेरे लैपटॉप बैग में डाल दीजिए काफी है।'
'ठीक है! तू कब निकलेगा! क्या अभी ?' माँ ने जल्दबाजी में कहा
दरवाजे के पीछे से पापा ने गंभीर आवाज मैं कहाँ 'तू ऑफिस के काम के लिए ही जा रहा है ना?'
एक पल के लिए मैं घबरा ही गया फिर मैंने डरते-डरते कहा 'हाँ पापा मैं ऑफिस के काम के लिए ही जा रहा हूं।'
आवाज़ धीमी करते हुए पापा ने कहा 'ठीक है! जा पहुंच कर फोन करना।'
'हाँ पापा मैं आता हूं। अब अपना ख्याल रखना।' इतना कहकर मैं अपने कमरे में आ गया।
माँ ने जल्दी से मेरे कपड़े निकाले और मेरे बैग में भर दिया और मुझे कुछ खाने की चीजें भी दी मैंने माँ को कहां 'माँ मैं आता हूं।' मैं घर से करीब रात के 1:00 बजे निकला। निकलने से पहले मैं फिर पापा के कमरे में गया और उनसे कहा 'पापा मैं आता हूं।' उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं गेट से बाहर जाने लगा जाते वक्त मैंने माँ से कहा 'मैं आता हूं माँ।' माँ ने मुस्कुरा कर कहा 'ठीक है बेटा अपना ख्याल रखना पहुंच कर फोन करना।' मैंने कहा 'ठीक है।'
मैं एयरपोर्ट पहुंच गया और मैंने अपनी फ्लाइट भी समय पर ले ली। सुबह के 8:00 बजे मैं उदयपुर एयरपोर्ट पर पहुंचा। एयरपोर्ट पर मेरा पहला कदम रखते ही मेरे दिमाग में दिल से पूछा "अब इसके आगे क्या?" यह तो मैंने सोचा ही नहीं? मैं उसके गाँव तक कैसे पहुंगा। इस असमंजस मैं एयरपोर्ट से बाहर निकला और मैं खड़ा ही था के तभी एक टैक्सी ड्राइवर मेरे पास आया और मुझसे कहने लगा 'कहां जाओगे भाई साहब?'
मैंने उनसे कहा 'मुझे झाडो जाना है।' उन्होंने कहा 'अच्छा! झाडो वहां जाने में एक घंटा 15 मिनट लगेगा 4000 रुपए से कम में नहीं जाऊंगा!'
मैंने कहा 'ठीक है कितने किलोमीटर का रास्ता है।' उन्होंने कहा '47.3 किलोमीटर!'
'ठीक है आप मुझे ले चलिए।'
इतना कहकर फिर मैं टैक्सी में बैठ गया और हम जाने लगे मैंने सबसे पहले माँ को फोन करके कहां 'मैं पहुंच गया हूं।' माँ ने कहा 'ठीक है! काम खत्म कर के मुझे फिर से फोन करना।' मैंने कहा 'ठीक है।'
इतना कहकर मैंने फोन रख दिया।
'भैया! झाडो आने के 15 मिनट पहले मुझे बताना।' मैंने ड्राइवर से कहा
उन्होंने कहा 'ठीक है भाई साहब। वैसे क्या पहली बार जा रहे हैं।'
'जी हाँ।' इतना कहकर मैंने अपना सर कार की सीट पर रख दिया और मैं थोड़ी देर के लिए सो गया।
मेरी नींद गहरी हुई ही थी के मुझे आवाज आई 'भैया झाडो आने में 15 मिनट रह गए हैं।'
मैंने उनसे कहा 'शुक्रिया भैया।'
मैंने अपना फोन निकाला और चांदनी को मैसेज किया कि 'मैं झाडो आ गाया हूं। कहां मिलना है बताओ।' उसका तुरंत रिप्लाई आता है वह कहती है 'झूठ बोल रहे हो ना।'
'तुम्हें क्यू लग रहा है मैं झूठ कह रहा हूं।' मैंने उसको लिखा
उसने कहा 'ठीक है आर.बी.वी.एम स्कूल से उसके सामने मिलते हैं।'
मैंने उससे कहा 'मैं 15 मिनट में वहां पहुंच रहा हूं तुम भी आ जाओ।'
ड्राइवर ने मुझसे कहा 'भैया! हम झाडो पहुंच गए हैं आपको कहां जाना है?'
मैंने उनसे कहा 'मुझे आर.बी.वी.एम स्कूल जाना है। आप मुझे वहां ले चलिए।'
ड्राइवर ने गाड़ी का शीशा नीचे किया और किसी से आर.बी.वी.एम स्कूल का पता पूछा। उस व्यक्ति के बताए अनुसार ही हम उस जगह पहुंच गए। हम 10 मिनट में वहां पहुंच गए। अभी 10:40 का समय हो रहा था। मेरे और ड्राइवर के अलावा वह कोई और मुझे नहीं दिखाई दे रहा था। एक पल के लिए मुझे लगा शायद वो नहीं आएगी लेकिन फिर भी मैं वेट करता रहा।
2 घंटे बाद.... मैंने देखा उस सुनसान रास्ते से दो लड़कियां चलकर आ रही थी। एक ने हरे रंग का सूट पहना हुआ था वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके साथ एक और लड़की भी चल कर आ रही थी लेकिन उस पर मेरी नजर नहीं पड़ी। मैंने कभी उसका चेहरा नहीं देखा था लेकिन उसकी आंखें देख कर मैं बता सकता हूं उनमें से चांदनी कौन है।छोटे-छोटे कदम लेकर वह दोनों मेरे पास आईं और जिसने हरे रंग का सूट पहना हुआ था वह मुझसे कहने लगी 'बताओ हम दोनों में से कौन है चांदनी?'
दोनों लड़कियों ने ही अपनी आंखों में काजल लगा रखा था। दोनों की आंखें भी एक जैसे ही दिखती थी लेकिन मैं उन दो आंखों को कैसे भूल सकता हूं जिसकी वजह से आज मैं यहां हूं मैंने उन आंखों की तरफ इशारा करते हुए कहा 'यह...यह है चांदनी।'
वह दोनों जोर से हंस पड़ी 'नहीं मैं! नहीं हूं!'
मैंने धीरे से मुस्कुरा कर उससे कहा 'एक पल के लिए मैं खुद को भूल सकता हूं लेकिन इन दो आंखों को मैं मरते दम तक नहीं भूल सकता। इन आंखों की गहराई को में नही भूल सकता। तुम ही हो मेरी चांदनी।'
'अच्छा क्या खास है इन आंखों मैं?' मेरी तरफ देखकर कहने लगी
'जब भी इन आंखों को देखता हूं मुझे ऐसा लगता है शायद यह मुझसे कुछ कहना चाहती हो जैसे उसके पास अनगिनत बातें है जो मुझसे करना चाहती है जो मुझे उसकी दुनिया दिखाना चाहती है...'
मैं कह ही रहा था कि तभी मेरी बात काटकर कहने लगती है 'मुझसे इतना प्यार कैसे कर सकते हो तुम? बिना देखे मुझसे प्यार कैसे किया?' सब कहते हुए उसकी आवाज में काफी दर्द था।
'प्यार तो दिल से होता है ना! रूप रंग से नहीं।' मैंने उससे कहा
'वैसे मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम आ जाओगे' उसने कहा
'मैं कैसे नहीं आता तुमने मुझे बुलाया था और तुमने साथ चलने का वादा भी किया था...'
मेरी बात को बीच में काट कर उसने मुझसे कहा 'देखो मुझे पता है तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो लेकिन मैं अपने घर परिवार इन सब को छोड़कर कैसे जाऊंगी।'
'ठीक है तो तुम्हारे घर पर चलकर उन्हें बता कर शादी कर लेते हैं।' मैंने कहा
उसने घबरा कर कहा 'हमारे गाँव में प्रेम विवाह नहीं होता है और जो भी करने की कोशिश करता है उसकी जान ले ली जाती है।'
'मैं तुमसे प्यार करता हूं तुम्हारे लिए मैं जान भी दे सकता हूं। अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो तुम मेरे साथ चलो या तुम्हारे परिवार के लोगों के पास जाकर हमारे रिश्ते के बारे में बताएंगे चाहे उसका परिणाम जो भी हो।'
'मैं भी तुमसे प्यार करती हूं और तुमने आज जो किया इसके बाद तो और ज्यादा मैं मैं तुम्हें किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती मैं भी तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी गुजारना चाहती हूं ठीक है मैं तुम्हारे साथ चलूंगी।'
उसकी सहेली घबराकर उसे कहती हैं 'देख चांदनी एक बार और सोच ले तू यहां से अगर गई तो उसके बाद तेरी लाश ही इस गाँव में वापस आएगी।'
'तू फिक्र मत कर सब ठीक होगा।' चांदनी ने विश्वास देते हुए कहां उन दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और आपस में कुछ बातें करी।
फिर चांदनी और मैं वापस उदयपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। एयरपोर्ट पहुंचते-पहुंचते शाम के 7:00 बज गए थे। मैंने ऑनलाइन ही टिकट बुक कर ली था। हमें 7:30 बजे की टिकट मिली थी। कुछ ही देर में हम पुणे जाने के लिए रवाना हो गए 11:30 बजे हम पुणे एयरपोर्ट पहुंचे और घर आते-आते 12:00 बज चुके थे। मैं और चांदनी हम दोनों ही बहुत ज्यादा डरे हुए थे। पूरे सफर है कभी मैं उसकी तरफ देखता तो वह कभी मेरी तरफ देखती पूरे सफर के दौरान हम दोनों ने एक दूसरे को कुछ नहीं कहा।
हम घर पहुंच गए मुझे अंदर जाने मैं बहुत घबराहट महसूस हो रही थी। मैं घरवालों का सामना कैसे करूंगा ना जाने मेरे दिलो-दिमाग क्या-क्या चल रहा था। अगर हमारे रिश्ते को किस ने स्वीकार ना किया तो हम क्या करोगे। मैंने हिम्मत करके घर का डोर बेल बचाया। हम इंतजार कर रहे थे दरवाजा खुलने का 10 मिनट बाद माँ ने दरवाजा खोला।
'अरे! तू तो कल आने वाला था आज कैसा? चल अच्छा है लेकिन बता कर तो आता चल अब अन्दर आ जा हाथ मुंह धो लो मैं कुछ खाने को देती हूं।' इतना कह कर माँ दरवाजे से पीछे हट गई। तब तक माँ ने चांदनी को नहीं देखा था।
'हाँ वापस फोन करना भूल गया मैं।' डर कर मैने कहा। मैंने चांदनी को मेरे साथ अंदर आने का इशारा किया वह मेरे पीछे ही थी। जब माँ की नजर चांदनी पर पड़ी तो चिल्लाकर कहा 'और यह कौन है।' मैंने पूरी विश्वास के साथ माँ को कहा 'मैं इसे ही लेने गया था। मैं इससे प्यार करता हूं में इससे शादी करना चाहता हूं। आप लोग हमारे इस रिश्ते को स्वीकार कर लीजिए।'
'क्या मतलब?' माँ ने चौक कर कहा 'क्या तू इस लड़की को भगा कर लाया है?'
मैंने कहा 'हाँ'
मां ने पापा को बुलाया पापा ने बस एक ही बात पूछूं 'क्या तुझसे प्यार करता है?' मैंने पूरे विश्वास के साथ कहा 'हाँ।' उन्होंने कहा 'ठीक है कल तुम दोनों की शादी करवा देंगे।'
सब अपने-अपने कमरे की तरफ चले गए मैं वहां खड़ा होकर सोचता रहा " मैं ना जाने क्या-क्या सोचता था पापा के बारे में कि वह कितने कठोर है और पापा तो... मेरी सोच के विपरीत निकले।पापा तो कितने ओपन माइंडेड है और उन्हें ना समाज का कोई डर और ना जाने क्या-क्या" यह सब सोचते-सोचते मे अपने कमरे में गया सोने की कोशिश करने लगा लेकिन मुझे नींद नहीं आई।
अगले दिन सुबह...
पापा मेरे पास एक सफेद रंग का कुर्ता लेकर आए और मुझे पहनने के लिए कहा। मैं जैसे ही अपने कमरे से निकला मेरे सामने मानसी चांदनी को लेकर खड़ी हुई थी चांदनी ने आज लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी जो मेरी माँ की साड़ी थी, हाथों में हरे रंग की कांच की चूड़ियां पहनी थी, माथे पर एक छोटी सी लाल रंग की बिंदी, गले में मेरी माँ का हार, बालों को मोगरे के फूल से सजाया था, आंखों पर गहरा काजल लगाया था। वह उस साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थी। मैं उसे देखते ही जा रहा था।
तभी मेरी बहन ने छोड़ते हुए कहा 'तुम दोनों का एक दूसरे को देखना खत्म हो गया हो तो हम चले देर हो रही है।' मेरे पापा मेरी बहन मेरी माँ और हमारे कुछ करीबी रिश्तेदार इन सब की मौजूदगी में चांदनी और मेरी शादी करवाई गई। हमने पहले रजिस्टार के वहां जाकर शादी करी उसके बाद मंदिर में जाकर महाराष्ट्रीयन तरीके से शादी करी।
हमारी शादी को लगभग 4 महीने हो चुके..
एक सुबह चांदनी कमरे में बैठ कर रो रही थी। मे घबरा कर उसके पास गया और पूछा 'क्या हुआ? कुछ हुआ है? क्या घर पर किसी ने कुछ कहा?'
तो उसने रोते हुए कहा 'नहीं तुम्हारे घरवाले बहुत अच्छे हैं। मुझे बस मेरे घरवालों मेरे गाँव की याद आ रही है।'
'अरे! ऐसी बात है तो तुम फोन क्यों नहीं कर लेती उन्हें। 'नहीं! मैं नहीं कर सकती' उसने बड़ी निराशा से कहा
'क्यों नहीं यह लो मेरा फोन से फोन करो।' मैंने अपना फोन आगे बढ़ाते हुए उसके कहा उसने मेरे हाथों से फोन लिया और अपनी बहन के फोन किया तीन-चार बार फोन करने के बाद उदास होकर फिर बैठ गई।
मेने पूछा 'क्या हुआ?'
उसने मुझसे कहा 'यह नंबर गलत है।'
'तो ठीक है ना तुम किसी और को फोन कर लो।' मैंने कहा
फिर उसने अपनी मम्मी माँ को फोन किया उसकी उसकी माँ का फोन उसके भाई ने उठाया उसके भाई ने गंभीर आवाज में कहां 'हेलो कौन?'
चांदनी ने डरी हुई आवाज में कहा 'भाई...'
इतना कह कर रोने लगी उसके भाई ने कहा 'चांदनी तू है कहां है तू रो क्यों रही है।'
'भाई मैं पुणे में हूं मैंने शादी कर ली है यहाँ सब बहुत अच्छे हैं मेरा बहुत ख्याल रखते हैं मेरे पति भी बहुत अच्छे हैं मेरे ससुराल वाले भी बहुत अच्छी है सब लोग बहुत अच्छे से ख्याल रखते हो भाई मुझे आप लोगों की बहुत याद आती है।' एक ही सांस में उसने उन्हें सारी बातें बता दि।
'चांदनी तू घर आजा अपने पति को लेकर।' उनहोंने बस इतना कहा
'भाई सच में! मैं अभी उनसे बोलती हूं हम कल ही आ रहे हैं वहां ठीक है भाई कल मिलते हैं।' इतना कहकर फोन रख दिया उसने
फिर मुझसे कहने लगी 'भाई ने हमें बुलाया है कल ही जाएंगे ना....जाएंगे ना हम वहां?'
'ठीक है में टिकट बुक कर लेता हूँ।'
मैंने टिकट बुक कर ली और मैं माँ को कहने गया कि हम जाने वाले हैं। मेरी माँ मुझे कहीं जाने से नहीं रोकती है लेकिन आज उन्होंने मुझसे कहा 'बेटा मुझे लगता है तुम्हारा वहां जाना ठीक नहीं है। पता नहीं क्यों मेरा दिल घबरा रहा है।' लेकिन मैंने ही उनसे कहा 'नहीं माँ चांदनी के भाई ने हमें बुलाया है आप फिकर मत करो।'
माँ ने ना चाहते हुए भी हमें जाने की अनुमति दे दी। 'बेटा पहुंच कर फोन करना।' माँ ने मुझे घर से निकलते हुए नम आंखों से कहा
'हाँ माँ मैं पहुंच कर फोन करूंगा। आप सब अपना ख्याल रखना हम जल्दी वापस आ जाएंगे।' मैंने उनसे कहा
घर से निकलते वक्त मैंने सब की तरह देखा और हल्का सा मुस्कुराया। हम दोनों एयरपोर्ट पहुंच गए हमने फ्लाइट ले ली और हम उदयपुर पहुंच गए। उदयपुर से हमने टैक्सी ली और हम जाने के लिए रवाना हो गए।
टैक्सी अभी कुछ दूर गई ही थी कि चांदनी ने मुझसे कहा
'में तुम से पहले मर जाऊं तो फिर हम कहां मिलेंगे? कभी मिल पाएंगे? क्या हमारा प्यार कभी मिल पाएगा? क्या हम फिर से एक होंगे? उसने मेरी तरफ देखकर कहा
मैंने उसकी नाक खींचकर उसके बालों पर हाथ फेरते हुए उससे कहा 'हाँ मिलेंगे ना "जन्नत के किनारे" (On The Edge Of Paradise) हम वहां मिलेंगे वहा हमें कोई अलग नहीं कर पाएगा। ना मौत ना समाज ना कोई दूसरा सिर्फ मैं और तुम वह हमारी एक अलग दुनिया होगी।' इसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया फिर मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और मेरी उंगलियों के बीच अपनी उंगली रख दिया। उसने मेरा हाथ बहुत कस कर पकड़ रखा दिया।
हम लोग झाडो पहुंच ही गए थे कि मैंने देखा बहुत सारे लोग हमारी गाड़ी की तरफ आ रहे हैं। हमारी गाड़ी को बीच सड़क पर रोक दिया गया। चारों तरफ से गाँव वालों ने हमारी गाड़ी को घेर लिया और जबरदस्ती गाड़ी का दरवाजा खोलने लगे। उन्होंने गाड़ी का शीशा तोड़ दिया गाड़ी के ड्राइवर को दरवाजा खोलने के लिए कहा ड्राइवर ने डर कर अपनी गाड़ी का दरवाजा खोल दिया। जैसे ही वे अंदर आए मुझे और चांदनी को गाड़ी से घसीटते हुए उतारा। चांदनी मेरा हाथ कस कर पकड़ी हुई थी लेकिन उनके घसीट ने की वजह से हम दोनों का हाथ छूट गया। उस वक्त मैंने चांदनी को आखिरी बार देखा इसके बाद में उसे कभी नहीं देख सका। उन लोगों ने मेरी कोई बात नहीं सुनी बिना मेरी बात सुने उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया। उन लोगों ने मुझे बोहोत मारा जब वे लोग मुझे मार रहे थे मुझे चांदनी की आवाज आई उसने चिल्लाकर कहा 'तुम लोग उसे मत मारो उसकी कोई गलती नहीं है मैं अपनी मर्जी से गई थी...' बस मैंने इतना सुना उसके बाद धीरे-धीरे मेरी आंखें बंद हो गई। गाँव वालों ने मेरी हत्या कर दी। मुझे नहीं पता चांदनी के साथ उन्होंने क्या किया। लेकिन मुझे विश्वास है कि हम दोनों मिलेंगे जल्दी ही 'जन्नत के किनारे'(On The Edge Of Paradise)
लेकिन उससे पहले आप लोग बताइए कि हम दोनों का क्या जुर्म था? प्यार करना! क्या प्यार करना एक अभिशाप है? क्या दो लोग अपनी जिंदगी का फैसला आपस में नहीं कर सकते? हमे खुद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं है। यह थी मेरी कहानी लेकिन आज भी कई ग्रामीण क्षेत्र में ऐसा होता है और सदियों से चला आ रहा है। प्रेम विवाह को घिनौनी नजर से देखा जाता है आज भी कई जगह ऐसे भी है जहां प्रेम विवाह को अपराध समझा जाता है जहां प्रेम विवाह करने वालों की हत्या तक कर दी जाती है। हमारी प्रशासन ने भी इसके लिए कई नियम बनाए हैं। लेकिन हमारा समाज इन नियमों का पालन नहीं करता है। वे अपने पूर्वजों की प्रथा को आगे बढ़ा रहे हैं और प्रेम विवाह को एक अभिशाप के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें अपने आसपास के लोगों को जागरूक करना चाहिए और इस मुद्दे को लेकर अपनी बात रखनी चाहिए। इस बात की जानकारी सभी को होनी चाहिए के प्रेम विवाह अपराध नहीं है अगर कोई इसको मानने से इनकार करे तो उसे सजा भी हो सकती है प्रशासन की तरफ से।
You cannot punish someone for falling in love,” Chief Justice of India Sharad A.
अस्वीकरण:- मेरा उद्देश्य किसी जाति को नीचा दिखाना नहीं है और ना किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना। कहानी में सभी व्यक्ति,नाम, जगह काल्पनिक है। यह किसी निजी की कहानी नहीं है यह हमारे समाज की कहानी है।
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